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ये जो तू रूठ जाती है ना . . .

कुछ सवाल . . .

गुलाब

रज़ामंदी

फिर रुक गयी . . .

मैं लिखता क्यों हूँ ?

बूढ़ा वृक्ष

कुछ तो बाकी है . . .

सफ़े ( पन्ने )

पिता

साँस

दिन और रात