कुछ सवाल जवाबों से परे,
मीलों दूर भटकते हैं
कि मानों जान भूझकर
भाग रहे हों . . .
कुछ सवाल आँखों को
नम कर देते हैं
कुछ सवाल उम्मीदों को
कम कर देते हैं
कुछ सवाल बच्चों की भाँती
बारिश में खेलते हैं
कुछ सवाल खुद बनाई हुई
कागज़ की कश्ती का पीछा करते हैं
बस जवाबों से आँख-मिचोली खेलते-खेलते
यों ही दौड़ते रहते हैं ये कुछ सवाल . . .
- मनिंदर सिंह
मीलों दूर भटकते हैं
कि मानों जान भूझकर
भाग रहे हों . . .
कुछ सवाल आँखों को
नम कर देते हैं
कुछ सवाल उम्मीदों को
कम कर देते हैं
कुछ सवाल बच्चों की भाँती
बारिश में खेलते हैं
कुछ सवाल खुद बनाई हुई
कागज़ की कश्ती का पीछा करते हैं
बस जवाबों से आँख-मिचोली खेलते-खेलते
यों ही दौड़ते रहते हैं ये कुछ सवाल . . .
- मनिंदर सिंह

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