बूढ़ा सा,
मुरझाया सा |
मानों ढूंढ रहा हो, वो रंग खोये हुए |
मानों याद कर रहा हो, वो अरमाँ सोये हुए |
इस कदर बेचैन, मानों अपना कोई छूट गया |
आँखें खुली पर सोया हुआ, मानों सपना कोई टूट गया |
एक वृक्ष खड़ा,
बूढ़ा सा,
मुरझाया सा |
सूखी पड़ी वो टहनियां, मानों खड़ी किसी इंतज़ार में |
ढूंढ रहीं उस सावन, मानों झुकी हों दीदार में |
बड़ा असहाय सा,
आँखों में उम्मीद लिए,
एक वृक्ष खड़ा,
बूढ़ा सा,
मुरझाया सा |
- मनिंदर सिंह

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