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हम आज भी सपने बुनते हैं...

मन की बात . . . .

माँ

ऐ ख़ुदा

इक अजीब सी कशमकश है . . . . . . . . .

ज़िंदगी के इस सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था...........

क्योंकि जीना इसी का नाम है............

जब आएं हैं यहां तो कुछ करना होगा .......

एक कविता दोस्त के नाम............