इक अजीब सी कशमकश है|
जब होते हैं अकेले तो सब याद आते हैं,
पर जब साथ हों तो चंद पलों में लम्हे बीत जाते हैं|
क्या ज़िंदगी का यही दस्तूर है?
जब साथ हों तो कुछ कदर ही नहीं,
पर जब दूर जाएं तो तन्हां हों जाते हैं|
ज़िंदगी के रंग-मंच पर सब अनोखे खिलाडी हैं,
पर इसे खेलते-खेलते सब अपनी यादें छोड़ जाते हैं|
जिसके बारे में कभी कुछ सोचा न हों,
वो बीते पलों में बार-बार याद आतें हैं|
वाकई ये इक अजीब सी कशमकश है|
जब याद आतें हैं वो, इक मुस्कान सी आ जाती है,
उनकी यादें मुझे रह-रहकर सताती हैं|
मैं अलबेला सा रहा हरपल दूर जिन पलों से,
उन पलों की यादें मुझे अंदर ही अंदर खाती हैं|
आज ये अलबेला इनके सामने बेबस है,
ये ज़िंदगी नही, इक अजीब सी कशमकश है . . . . . . . . .
- मनिंदर सिंह
जब होते हैं अकेले तो सब याद आते हैं,
पर जब साथ हों तो चंद पलों में लम्हे बीत जाते हैं|
क्या ज़िंदगी का यही दस्तूर है?
जब साथ हों तो कुछ कदर ही नहीं,
पर जब दूर जाएं तो तन्हां हों जाते हैं|
ज़िंदगी के रंग-मंच पर सब अनोखे खिलाडी हैं,
पर इसे खेलते-खेलते सब अपनी यादें छोड़ जाते हैं|
जिसके बारे में कभी कुछ सोचा न हों,
वो बीते पलों में बार-बार याद आतें हैं|
वाकई ये इक अजीब सी कशमकश है|
जब याद आतें हैं वो, इक मुस्कान सी आ जाती है,
उनकी यादें मुझे रह-रहकर सताती हैं|
मैं अलबेला सा रहा हरपल दूर जिन पलों से,
उन पलों की यादें मुझे अंदर ही अंदर खाती हैं|
आज ये अलबेला इनके सामने बेबस है,
ये ज़िंदगी नही, इक अजीब सी कशमकश है . . . . . . . . .
- मनिंदर सिंह

वाकई ये ज़िंदगी इक अजीब सी कशमकश है
ReplyDeleteThnku Di
Deleteits amazing mani..
ReplyDeleteThnq so much Jass . . . . . .
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