हम आज भी सपने बुनते हैं...


जो कभी हमारी बातों के दीवाने थे,
आज वो बात हमारी सुनते हैं|
उनकी यादों को दिल में रख कर,
हम आज भी सपने बुनते हैं|

कुछ बातें उन्ही की याद हैं,
कुछ पल उन्ही में बीते थे|
कह दो उन्हें की हम तब भी,
उन यादों के सहारे जीते थे|

वो कह गए थे कभी फिर मिलेंगे,
उस कभी के पीछे भागे थे,
उन्हें चुभ ना जाएं राहों में,
हम वो आज भी कांटे चुनते हैं|

जो आज हमें पहचानते नहीं,
पहचान उन्हें अपनी कहते हैं|
आज भी उन यादों में नयन,
गंगा-यमुना से बहते हैं|

हमें भीड़ में अकेला छोड़ दिया,
उन्हें आज भी भीड़ में चुनते हैं|
उनकी यादों को दिल में रख कर,

हम आज भी सपने बुनते हैं..........
        
                         - मनिंदर सिंह 

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