जब आएं हैं यहां तो कुछ करना
होगा,
हर समुद्र का पानी इस घाट में
भरना होगा|
चाहने से इंसान को तो भगवान भी
मिल जाए,
इस चाहत को सफलता में बदलना होगा|
ये राज़ है ज़िन्दगी इसे राज़ रहने
दो,
मुझे भी इस धारा के साथ बहने
दो|
अपना रस्ता निकालने में एक अनोखा
आनंद है,
ज़िन्दगी के इन रंगों का मुझे
आनंद लेने दो|
बीतें पलों को सोच पछताना एक
सज़ा है,
समय के साथ चलना ही उसकी रज़ा
है|
पछताने से तो यों गुज़र जाएँगी
लाखों घड़ियाँ,
अपनी भूल से सीखने में अपना ही
मज़ा है|
आज आँखें ढूंढती हैं सफर के उन
मुसाफिरों को,
जो कंधे से कंधा मिला चलते रहे|
याद आ रहे हैं तमाम वो शब्द उनके,
हरदम आगे बढ़ने के लिए जो उन्होंने
कहे|
जो नहीं कर पाया कोई मुझे वो
करना होगा,
अपनों की इस चाहत को सफलता में
बदलना होगा|
चाहने से इंसान को तो भगवान भी
मिल जाए,
हर चाहत को सफलता में बदलना होगा|
- मनिंदर सिंह

bhai u r amazing as a writer
ReplyDeleteN ur best as a motivator to me.......
Thanx Alot Manish
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