जब आएं हैं यहां तो कुछ करना होगा .......

जब आएं हैं यहां तो कुछ करना होगा,
हर समुद्र का पानी इस घाट में भरना होगा|
चाहने से इंसान को तो भगवान भी मिल जाए,
इस चाहत को सफलता में बदलना होगा|

ये राज़ है ज़िन्दगी इसे राज़ रहने दो,
मुझे भी इस धारा के साथ बहने दो|
अपना रस्ता निकालने में एक अनोखा आनंद है,
ज़िन्दगी के इन रंगों का मुझे आनंद लेने दो|

बीतें पलों को सोच पछताना एक सज़ा है,
समय के साथ चलना ही उसकी रज़ा है|
पछताने से तो यों गुज़र जाएँगी लाखों घड़ियाँ,
अपनी भूल से सीखने में अपना ही मज़ा है|

आज आँखें ढूंढती हैं सफर के उन मुसाफिरों को,
जो कंधे से कंधा मिला चलते रहे|
याद आ रहे हैं तमाम वो शब्द उनके,
हरदम आगे बढ़ने के लिए जो उन्होंने कहे|

जो नहीं कर पाया कोई मुझे वो करना होगा,
अपनों की इस चाहत को सफलता में बदलना होगा|
चाहने से इंसान को तो भगवान भी मिल जाए,
हर चाहत को सफलता में बदलना होगा|


                              - मनिंदर सिंह 








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