बड़ी खूबसूरत सी बात हुई मेरी और मेरे मन के बीच में . . . . .
मैंने उससे पूछा. . . .
ऐ मन,
क्यों तू कहीं खो जाता है ?
क्यों तू कहीं खो जाता है ?
जिन लम्हों को कभी जिया था,
गम उनमे भी कभी पीया था,
फिर भी उन हसींन पलों को याद कराता है,
सच बता तू क्यों इतना खो जाता है ?
गम उनमे भी कभी पीया था,
फिर भी उन हसींन पलों को याद कराता है,
सच बता तू क्यों इतना खो जाता है ?
शायद वो तुझे कभी याद न करें,
उन लम्हों को सोच वक़्त बर्बाद न करें,
फिर भी फ़िक्र में उनकी दिन बिताता है,
क्या है ऐसा जो तू इतना खो जाता है ?
उन लम्हों को सोच वक़्त बर्बाद न करें,
फिर भी फ़िक्र में उनकी दिन बिताता है,
क्या है ऐसा जो तू इतना खो जाता है ?
सही कहते है तू सच में बावरा है,
तू नही जानता कि तेरे साथ क्या हो रहा है,
क्या है ऐसा जो तू खुद को रोक नही प|ता है,
यार सच बता तू क्यों इतना खो जाता है ? . . . . . .
तू नही जानता कि तेरे साथ क्या हो रहा है,
क्या है ऐसा जो तू खुद को रोक नही प|ता है,
यार सच बता तू क्यों इतना खो जाता है ? . . . . . .
बड़ी ही सरलता से उसने जवाब दिया. . . .
सुन मेरे भोले से दोस्त. . . .
ज़िन्दगी का क्या पता ,आज है कल नहीं,
यही यादें ही तो तेरे जीवन का सहारा रहीं,
यही सच है तेरे जीवन का जो मैं बताता हूँ,
शायद इसी कारण मैं उन सब यादों में खो जाता हूँ|
आग पानी से बुझती है, कभी आग से नहीं,
इन बातों का हल दिल से होता है, दिमाग से नहीं,
तू कभी समझता नहीं जो मैं तुझे समझाता हूँ,
शायद इसीलिए मैं उन अपनों में खो जाता हूँ|
चाहे सभी मुझे बोलते हैं बावरा ,
पर औरों की तरह सच्चाई से तो नहीं भाग रहा,
जो बात तू कभी कह नहीं पाता, उसे मैं अच्छे से जान जाता हूँ,
शायद इसीलिए. . .
हाँ इसीलिए मैं हर लम्हों में खो जाता हूँ . . . . . . . . .

Awesome lines
ReplyDeleteThnq Dear . . .
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