वो लम्हा बड़ा ख़ुशी भरा था , जब ज़िंदगी के अहम मोड़ पे में खड़ा था,
कुछ ख़ुशी थी कुछ दर्द था,जब घर से में चल पड़ा था |
बस कुछ यादें थी मेरे साथ,और दर्द भरा सीना था,
ज़िंदगी के इस सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था |
लेकर अपनों का साथ, जब मैं आया इस मोड़ पर,
याद आ रहे थे वो दोस्त, जिन्हे आया था मैं छोड़कर|
सोचा ना था कि इस जिंदगी कि हर बूँद को अकेले पीना था,
जिंदगी के इस सफर में अकेले ही मुझे जीना था|
इक अजब सी सनसनाहट मेरे भीतर भरी पड़ी थी,
जिंदगी मेरे आगे लाखों चुनौती लिए खड़ी थी|
लग रहा था इन खुशियों ने मेरे पलों को मुझसे छीना था,
ज़िंदगी के इस सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था |
सब कुछ नया नया सा था, कुछ कुछ था अंजाना,
ऐ दोस्तों मुश्किल हो गया तुम्हारे उन पलों को भुलाना|
सच यही था मेरे साथियों, अब जीना तुम्हारे बिना था,
इस अनजाने सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था......
- मनिंदर सिंह
कुछ ख़ुशी थी कुछ दर्द था,जब घर से में चल पड़ा था |
बस कुछ यादें थी मेरे साथ,और दर्द भरा सीना था,
ज़िंदगी के इस सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था |
लेकर अपनों का साथ, जब मैं आया इस मोड़ पर,
याद आ रहे थे वो दोस्त, जिन्हे आया था मैं छोड़कर|
सोचा ना था कि इस जिंदगी कि हर बूँद को अकेले पीना था,
जिंदगी के इस सफर में अकेले ही मुझे जीना था|
इक अजब सी सनसनाहट मेरे भीतर भरी पड़ी थी,
जिंदगी मेरे आगे लाखों चुनौती लिए खड़ी थी|
लग रहा था इन खुशियों ने मेरे पलों को मुझसे छीना था,
ज़िंदगी के इस सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था |
सब कुछ नया नया सा था, कुछ कुछ था अंजाना,
ऐ दोस्तों मुश्किल हो गया तुम्हारे उन पलों को भुलाना|
सच यही था मेरे साथियों, अब जीना तुम्हारे बिना था,
इस अनजाने सफर में अब अकेले ही मुझे जीना था......
- मनिंदर सिंह
Massssssstamm :-)
ReplyDeleteThnku so Mch frnd
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